ईरान के खुरासाने जुनूबी प्रांत में दो हज़ार शहीदों के संबंध में एक कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में ईरान की इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान के कमांडर मोहम्मद अली जाफ़री ने कहा कि दुश्मन ईरान को हरा देने की आकांक्षा अपने साथ अपनी क़ब्र में ले जायेंगे।
साथ ही उन्होंने ईरान को अशांत करने हेतु दुश्मनों के प्रयासों की ओर संकेत किया और कहा कि दुश्मन ईरानी जनता को थका देने और इस्लामी गणतंत्र ईरान को घुटने टेक देने के लिए बाध्य कर देने के लिए प्रयास कर रहे हैं परंतु ईरानी जनता के प्रतिरोध के कारण वे अपने लक्ष्य में सफल नहीं होंगे।
इस कार्यक्रम में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के बयान को भी पढ़ा गया। वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अपने बयान में कहा कि शहीद जब ज़िन्दा थे तब उन्होंने अपना प्राण न्यौछावर करके देश की रक्षा की और शहीद होने के बाद अब वे अपने अध्यात्म से देश और इस्लाम की रक्षा कर रहे हैं।
इस आधार पर पवित्र प्रतिरक्षा समाप्त होने वाली नहीं है और वह एक वास्तविकता है जो आगे बढ़ रही है।
इस्लामी क्रांति का इतिहास आध्यात्मिक मूल्यों और बलिदान व जेहाद की घटनाओं से भरा पड़ा है। इस बीच शहादत और परित्याग जैसे मूल्य हैं जो कभी भी समाप्त नहीं होंगे और यह चीज़ इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद अस्तित्व में आई जो यथावत जारी है।
एक अध्ययनकर्ता और प्रोफेसर माइकल फीशर ईरान की इस्लामी क्रांति के संबंध में लिखी अपनी पुस्तक में इस बिन्दु की ओर संकेत करते और लिखते हैं कि इस्लामी क्रांति से लोगों में एक धार्मिक परिवर्तन आया जो क्रांति की सफलता का कारण बना।"
इस परिवर्तन ने गत चालिस वर्षों से परिपूर्णता का मार्ग तय किया है और उसने आगामी पीढ़ियों को बहुत पाठ दिया है। इस प्रक्रिया में शहीदों का विशेष स्थान है यहां तक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने शहीदों को मानवता की महफिलों का चेराग़ बताया है।
इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध के दौरान जो ईरानी शहीद हुए थे उनके संबंध में कार्यक्रम आयोजित करना वास्तव में उन मूल्यों की रक्षा करना है जो यथावत जारी हैं।
इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान के कमांडर मोहम्मद अली जाफ़री के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि शहीदों का खून इस्लामी व्यवस्था के बाकी रहने और क्षेत्र एवं विश्व में प्रतिरोध की भावना के विस्तृत होने का रहस्य है।
बहरहाल वर्चस्ववादी शक्तियों और दुश्मनों की पराजय का एकमात्र कारण प्रतिरोध और शहादत की भावना का जारी रहना है।